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LBSNAA: जहां IAS-IPS को सिखाए जाते हैं देश चलाने के गुण, हर UPSC Aspirant का होता है सपना

Vikash Kumar
5 Aug 2022 11:56 AM GMT
LBSNAA: जहां IAS-IPS को सिखाए जाते हैं देश चलाने के गुण, हर UPSC Aspirant का होता है सपना
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गौरतलब है कि LBSNAA में आम लोगों के आने पर बैन है. अगर कोई व्यक्ति टूरिस्ट होने के नाते एकेडमी अंदर से देखना चाहता है

LBSNAA Interesting Facts: आईएएस-आईपीएस (IAS-IPS) बनने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थी हर साल सिविल सर्विस परीक्षा (Civil Service Examination) की तैयारी करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास करने और किसी जिले में पोस्टिंग मिलने से पहले आईएएस-आईपीएस क्या करते हैं? वो कहां जाते हैं? उनकी ट्रेनिंग कहां होती है? तो इसका एकमात्र जवाब है LBSNAA. बता दें कि आईएएस-आईपीएस की ट्रेनिंग (IAS-IPS Training) उत्तराखंड (Uttarakhand) के मसूरी (Mussoorie) में स्थित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) में कराई जाती है.

LBSNAA में होती है आईएएस-आईपीएस की ट्रेनिंग

बता दें कि LBSNAA में ट्रेनिंग के दौरान ट्रेनी आईएएस-आईपीएस को कड़े नियमों का पालन करना होता है. यहां उन्हें सिखाया जाता है कि प्रशासनिक काम कैसे करने हैं. जान लें कि LBSNAA की स्थापना 15 अप्रैल, 1958 को तत्कालिक गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने की थी. पहले LBSNAA का नाम नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन था. हालांकि, बाद में इसका नाम बदलकर लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन (LBSNAA) कर दिया गया.

LBSNAA में होती है दो साल की ट्रेनिंग

गौरतलब है कि LBSNAA में आम लोगों के आने पर बैन है. अगर कोई व्यक्ति टूरिस्ट होने के नाते एकेडमी अंदर से देखना चाहता है तो वह नहीं देख सकता है, यह नियम के विरूद्ध है. जान लें कि LBSNAA में ट्रेनी आईएएस-आईपीएस की दो साल की ट्रेनिंग होती है और कोर्स पूरा होने पर उन्हें मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) की डिग्री दी जाती है.

ट्रेनिंग के दौरान फॉलो करने पड़ते हैं कड़े नियम

जान लें कि ट्रेनिंग के दौरान LBSNAA परिसर में कोई भी ट्रेनी आईएएस-आईपीएस फॉर्मल ड्रेस ही पहन सकता है. यहां मेस का खाना खाने के लिए भी ड्रेस कोड तय है. तय ड्रेस कोड को फॉलो नहीं करने पर जुर्माना भरना पड़ता है.

बता दें कि LBSNAA के बारे में ये तथ्य कुछ ही लोगों को पता होगा. LBSNAA में भूटान, मालदीव्स, बांग्लादेश और म्यांमार के कुछ चुनिंदा सिविल सर्वेंट्स को भी ट्रेनिंग दी जाती है.

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