Taj Mahal नहीं, किसी और जगह था मुमताज का पहला मकबरा! आगरा में खास वजह से हुआ था निर्माण
 

ताज महल अपने में इतना अनोखा है कि इससे जुड़े कई ऐसे फैक्ट हैं जिसके बारे में लोग नहीं जानते होंगे. आज हम ऐसे ही कुछ फैक्ट्स (Taj Mahal Facts) के बारे में बताने जा रहे हैं.

ताज महल को प्यार की मिसाल माना जाता है. मगर प्रेम का ये प्रतीक इन दिनों विवादों (Taj Mahal controversy) में है. इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें ताज महल के नीचे 22 कमरों (22 rooms in Taj Mahal) के होने की बात कही गई है और उसे खुलवाने की भी मांग की गई है. इतिहासकारों ने कहा है कि अगर कमरे खुलते हैं तो कई राज़ का खुलासा हो जाएगा. अब ये तो जांच का विषय है मगर ताज महल अपने में ही इतना अनोखा है कि इससे जुड़े कई ऐसे फैक्ट हैं जिसके बारे में लोग नहीं जानते होंगे. आज हम ऐसे ही कुछ फैक्ट्स (Taj Mahal Facts) के बारे में बताने जा रहे हैं

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इतिहासकारों के अनुसार मुमताज महल (Mumtaz Mahal), मुगल बादशाह शाहजहां (Shah Jahan) की तीसरी पत्नी थी जो उसकी सबसे खास थीं. मुमताज का असली नाम अर्जुमंद बानो बेगम था और उसे मुमताज महल नाम शाहजहां ने ही दिया था. 

मुमताज जब शाहजहां के 14वें बच्चे को जन्म दे रही थीं तब उनकी प्रसव के दौरान शारीरिक समस्या होने से उनके जान पर बन आई. उस दौरान उन्होंने शाहजहां से वादा लिया था कि उनके मरने के बाद वो दूसरी शादी ना करें और उनके लिए एक खूबसूरत मकबरा बनवाएं. इसके बाद उनकी मौत हो गई थी.

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माना जाता है कि शाहजहां, मुमताज की मौत के बाद डिप्रेशन में आ गए थे जिससे उनके बाल जल्द ही सफेद होने लगे थे. यहां मुमताज की कब्र से जुड़ी एक हैरान करने वाली बात भी बताना जरूरी है. वो ये कि ताज महल मुमताज का पहला मकबरा (Mumtaz Mahal original tomb) नहीं है. उनके मरने के बाद मध्य प्रदेश के बुरहानपुर (Burhanpur, Madhya Pradesh) में स्थित अहुखाना में मुमताज की लाश को करीब 6 महीने रखा गया था. इस जगह को मुगलों ने अपने आराम और शौक के लिए बनवाया था. 1620 के करीब शाहजहां ताप्ति नदी के पास बने अहुखाना (Ahukhana) में ही मुमताज के साथ रहने लगे थे क्योंकि उनके दुशमनों के हमले बढ़ते जा रहे थे. 6 महीने बाद मुमताज की लाश को यमुना के किनारे करीब 22 सालों तक दफ्त किया गया और जब ताज महल पूरा बन गया, तब लाश को वहां दफनाया गया.

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ताज महल का निर्माण 1632 में शुरू हुआ और करीब 1647 तक उसका निर्माण पूरा हो गया मगर सजावट तक करने में कुल 22 साल तक का वक्त लग गया था. शाहजहां के मरने के बाद उसे भी उसके बेटे औरंगजेब ने ताज महल में, मुमताज महल के बगल में दफना दिया था.

ताज महल को बनाने में 20 हजार तक मजदूर लगे थे. जो भारत, पर्शिया, और यूरोप से भी बुलाए गए थे. एक काफी चौंकाने वाली बात जो ताज महल और उसके मजदूर से जुड़ी प्रसिद्ध है वो ये कि शाहजहां ने इसे बनाने वाले मजदूरों के हाथ काट दिए थे जिससे वो दोबारा ऐसी इमारत ना बना सकें. इस बात की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है और कई इतिहासकारों ने इसे सिर्फ अफवाह ही बताया है. इस तथ्य के सही या गलत होने पर न्यूज18 हिन्दी कोई दावा नहीं करता


अब आपको बताते हैं कि ताज महल को आगरा में ही क्यों बनवाया गया और बुरहानपुर में क्यों नहीं निर्माण करवाया गया जहां पहले मुमताज को रखा गया था. माना जाता है कि बुरहानपुर के मिट्टी में दीमक बहुत हैं, इसलिए नीचे बने लकड़ी के ढांचे लंबे वक्त तक टिक नहीं पाते. दूसरा ये कि शाहजहां चाहते थे कि ताज महल की झलक नदी में नजर आए मगर ताप्ति नदी इतनी फैली हुई नहीं थी वहीं यमुना का आकार बेहद विशाल था इसलिए इस यमुना किनारे बनाया गया. तीसरा ये कि ताज महल को दिल्ली के नजदीक तो बनाना ही था, साथ में राजस्थान के भी नजदीक बनाना था जहां से इसे बनाने के लिए ज्यादा मार्बल आए थे