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हरियाणा के वेटलिफ्टर दीपक लाठर के सपनों को रिलायंस फाउंडेशन ने लगाए पंख, तैराकी के दौरान हो गया था ये हादसा
 

दीपक लाठर --  जो की हरियाणा के जींद शहर से हैं -- ने दस साल की उम्र में अपने पहले खेल तैराकी में हिस्सा लिया था। हालांकि, लाठर का ये खेल कुछ ही समय तक चला क्योंकि अपने शुरुआती प्रशिक्षण सत्र में से एक के दौरान उनका सिर स्प्रिंग बोर्ड पर जा लगा था। 

पर, उनकी किस्मत में खेलों में ही चमकना लिखा था और लाठर को एक और खेल, वेटलिफ्टिंग में अपना हुनर दिखाने का मौका मिला। थोड़ी देर तक प्रशिक्षण हासिल करने के बाद लाठर ने तुरंत ही प्रभावशाली परिणाम देना शुरू कर दिया। 

2012 में यूथ नेशनल्स में, वह 50 किलोग्राम वर्ग में दूसरे स्थान पर रहे और एक साल बाद, लाठर को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपना खेल दिखाने का पहला मौका मिला, जब उन्होंने यूथ वर्ल्ड चैंपियनशिप्स में भाग लिया, जहां उन्होंने 12वां स्थान हासिल किया।

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तीन साल बाद, उनकी असाधारण क्षमता ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देना शुरू कर दिया और उन्होंने 2015 कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप्स में एक गोल्ड जीता।  इसके बाद 62 किलोग्राम वर्ग में कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में उन्होंने एक और स्वर्ण पदक जीता। 

फिर ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में 2018 में आयोजित किए गए कॉमनवेल्थ गेम्स में, 18 वर्षीय लाठर ने खेल समुदाय का ध्यान आकर्षित किया, जब वे कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक जीतने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय वेटलिफ्टर बन गए। वहां पर उन्होंने 69 किलोग्राम वर्ग में 295 किलोग्राम कुल वजन उठा कर कांस्य पदक जीता।

जबकि उनका प्रारंभिक दौर कई लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला था, लाठर के लिए अपनी क्षमता को मज़बूत करने का काम  जारी रखने के लिए, कई तरह के प्रोफेशनल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। 2019 में, उन्हें चार अन्य प्रतिभाशाली वेटलिफ्टर्स के साथ, नए लॉन्च किए गए रिलायंस फाउंडेशन यूथ स्पोर्ट्स (आरएफवाईएस) एलीट एथलीट स्कॉलरशिप स्कीम में शामिल किया गया।

मुंबई में सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में रीहैबलिएटेशन एंड स्पोर्ट्स मेडिसन डिपार्टमेंट में सीनियर फिजियोथेरेपिस्ट जिमित कपाड़िया, जिन्होंने लाठर को ऑन-बोर्ड लाए जाने के बाद प्रारंभिक जांच की, ने देखा कि वह हैमस्ट्रिंग और हड्डियों से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे थे और उन्हें काफी गहन रीहैब और खेल आधारित मजबूती और कंडीशनिंग की सख्त जरूरत थी। 

आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (एएसआई), पुणे,  जहां लाठर प्रशिक्षण  ले रहे थे, ने एक समर्पित पावर और कंडीशनिंग विशेषज्ञ, राहुल वशिष्ठ को नवंबर, 2019 से शुरू होने वाले तीन महीने की अवधि के लिए उनके लिए नियुक्त किया गया।  लगातार की गई मेहनत के चलते उनके फिटनेस स्तर में सुधार हुआ और धीरे-धीरे लाठर ने अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ अंक हासिल करना शुरू कर दिये ।

आरएफवाईएस द्वारा प्रदान की गई सहायता ने तब से लाठर के करियर में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। पिछले महीने पटियाला में नेशनल वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स से पहले, उनके दाहिने कूल्हे में उन्हें  दर्द महसूस हुआ। प्रतियोगिता के बस 2 हफ्ते  दूर होने के कारण, वह अपनी दिनचर्या की तीव्रता को कम करने की स्थिति में नहीं थे।

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फिजियोथेरेपिस्ट गीतांशु शर्मा ने सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में रीहैबलिएटेशन एंड स्पोर्ट्स मेडिसन डिपार्टमेंट में अपने सहयोगियों के साथ एक योजना तैयार की, और  लाठर को समय पर तैयार होने का भरोसा दिया।

दर्द रहित और आत्मविश्वास से भरपूर, लाठर ने पटियाला में शानदार प्रदर्शन किया । रिलायंस फाउंडेशन द्वारा समर्थित एक अन्य वेटलिफ्टर अचिंता श्युली – जिन्होंने इसी वर्ष में पहले, विश्व जूनियर चैंपियनशिप्स में रजत पदक जीता था – के साथ एक टाइटैनिक लड़ाई में, 73 किलोग्राम  वर्ग में, लाठर ने स्नैच में 145 किलोग्राम का अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ स्कोर हासिल किया और श्युली द्वारा पाया गया पिछला राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ 141 किलोग्राम मार्क पीछे छोड़ दिया।     

साथ ही लाठर ने क्लीन एंड जर्क में 166 किलोग्राम वजन उठाकर पिछले राष्ट्रीय सर्वश्रेष्ठ को भी पीछे छोड़ दिया, और  कुल मिला कर  उनका 311 किलोग्राम का आंकड़ा रहा । श्युली ने उन्हें प्रतियोगिता की सबसे तीव्र प्रतिस्पर्धा वाली श्रेणी में केवल 1 किलोग्राम से हराकर, क्लीन एंड जर्क में 169 किलोग्राम की सर्वश्रेष्ठ लिफ्ट के साथ, कुल 312 किलोग्राम दर्ज करने के लिए स्वर्ण पदक जीता। 

एएसआई, पुणे में चीफ वेटलिफ्टिंग कोच इकबाल सिंह भट्टी का कहना है कि ‘‘दीपक बहुत जल्दी सीखने वाला, आत्म-प्रेरित और लक्ष्य हासिल करने के लिए समर्पित खिलाड़ी है। उनकी ताकत यह है कि वह बहुत अनुशासित, केंद्रित और नई चीजें और तकनीकें  सीखने के उत्सुक हैं ।’’

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कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक जीतने के बाद लाठर  के साथ काम करने वाले भट्टी को एक और चिंता थी लाठर की मानसिक कमजोरी। सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में लीड स्पोर्ट एंड एक्सरसाइज साइकोलॉजिस्ट मैथिली भूपटानी ने लाठर के साथ काम करते हुए घंटों बिताए और कई कोणों से समस्या का सामना किया और यह सुनिश्चित किया कि लाठर में चुनौतियों से निपटने का आत्मविश्वास विकसित हो ।

लाठर का कहना है कि ‘‘जब मैं  लिफ्ट करने वाला होता हूँ, उस समय के मेरे रवैये में काफी बदलाव आया है। पहले, मुझे इस बारे में संदेह होता था कि मैं वजन उठा पाऊंगा या नहीं। पर, हाल ही में मैंने काफी आत्मविश्वास हासिल किया है और अब मैं अपना पूरा ज़ोर लगा कर और  सकारात्मक विचारों के साथ वजन उठाने का प्रयास करता हूँ ।’’ 

लाठर, जो की सेना में हैं, और जिनकी  ताकत अभी चरम पर है , उनके  निशाने पर कई हाई-प्रोफाइल प्रतियोगिताएं हैं, जिनमें 2022 में कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स, 2023 में वर्ल्ड चैंपियनशिप्स और 2024 में पेरिस में ओलंपिक गेम्स शामिल हैं। उनका कहना है कि उनसे अब इनमें जाने के लिए अधिक इंतजार नहीं हो पा रहा है। ज़ाहिर  है, वह  अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाने के लिए उत्सुक हैं ।