राजनीति

अनूठा किस्सा: जब भगवत दयाल बोले मैने भजन भी गाया, बंसी भी बजाई, अब देवी की पूजा करुंगा

Navdeep Setia
23 Sep 2022 9:04 AM GMT
अनूठा किस्सा: जब भगवत दयाल बोले मैने भजन भी गाया, बंसी भी बजाई, अब देवी की पूजा करुंगा
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पंडित भगवत दयाल शर्मा: हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री। कई बार जेल गए। उड़ीसा और मध्यप्रदेश के राज्यपाल रहे। राज्यसभा सदस्य बने तो सांसद भी चुने गए। हरियाणा गठन के बाद 1 नवम्बर 1966 को मुख्यमंत्री बने। महज चार माह के लिए इस पद पर रहे। हरियाणा की सियासत में तीनों लाल चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल के साथ काम किया।

पंडित भगवत दयाल शर्मा: हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री। कई बार जेल गए। उड़ीसा और मध्यप्रदेश के राज्यपाल रहे। राज्यसभा सदस्य बने तो सांसद भी चुने गए। हरियाणा गठन के बाद 1 नवम्बर 1966 को मुख्यमंत्री बने। महज चार माह के लिए इस पद पर रहे। हरियाणा की सियासत में तीनों लाल चौधरी देवीलाल, चौधरी बंसीलाल और चौधरी भजनलाल के साथ काम किया।

एक समय ऐसा भी आया जब पंडित भगवत दयाल पूरी तरह से टूट चुके थे। सियासी तौर पर वे बिखर गए थे। उस समय उन्होंने चौधरी देवीलाल की शरण ली। ताऊ की शरण में आते हुए भगवत दयाल बोले मैने भजन भी गा लिया और बंसी भी बजा ली अब देवी की पूजा करूंगा।

दरअसल भगवत दयाल शर्मा हरियाणा गठन के पहले संयुक्त पंजाब में सियासत के बड़े किरदार थे। 26 जनवरी 1918 को झज्जर के बेरी में उनका जन्म हुआ। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया। 1941 से लेकर 1947 तक स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया। कई बार जेल गए। 1959 से 1961 तक ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। 1 नवम्बर 1966 को हरियाणा के मुख्यमंत्री बने। इस पद पर 24 मार्च 1967 को रहे। राव बीरेंद्र सिंह और देवीलाल ने उनकी सरकार गिरा दी थी।

भगवत दयाल शर्मा 1968 से 1974 तक राज्यसभा के सदस्य रहे। 1977 में उड़ीसा के राज्यपाल बने। बाद में मध्यप्रदेश के राज्यपाल भी रहे। उनके सियासी जीवन में एक वक्त ऐसा आया जब भगवत दयाल बिल्कुल टूट चुके थे। सियासत में हाशिए पर चले गए थे। यह दौर था साल 1984 के आसपास का।

इसी दौर में देवीलाल सियासी वापसी को लेकर संघर्ष कर रहे थे। उस समय हरियाणा में कांग्रेस की सरकार थी और भजनलाल मुख्यमंत्री थे। राजीव-लौंगेवाल समझौते को लेकर हरियाणा की सियासत में उबाल आया हुआ था। साल 1985 में देवीलाल सहित लोकदल के 22 विधायकों ने इस्तीफे दे दिए थे।

स्पीकर ने देवीलाल का इस्तीफा स्वीकार कर लिया। कांग्रेस के भी कुछ विधायकों ने इस्तीफे दिए। देवीलाल चूंकि साल 1982 के विधानसभा चुनाव में महम से विधायक चुने गए थे। सितम्बर 1985 में महम सीट पर हुए उपचुनाव में चौधरी देवीलाल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद तो देवीलाल एक मॉस लीडर के रूप में उभरकर सामने आए।

उन्होंने 1985 में दिल्ली में एक रैली की। इसके बाद 1986 के शुरूआत में राज्यभर में रास्ता रोको आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन को अभूतपूर्व कामयाबी मिली। हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री रहे भगवत दयाल शर्मा भी देवीलाल के पाले में आ गए। तब भगवत दयाल शर्मा ने एक बहुत ही भावनात्मक वक्तव्य भी दिया। देवीलाल की ओर से आयोजित एक रैली में भगवत दयाल ने मंच से कहा कि मैने भजन भी गा लिया और बंसी भी बजा ली अब मैं देवी की पूजा करुंगा। तो ऐसे में हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री रहे भगवत दयाल शर्मा का आखिरी वक्त चौधरी देवीलाल के साथ ही बीता।

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