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वेब पोर्टलों पर चल रही फेक न्यूज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी, कहा कोई कुछ भी चला देता है
 

देश में न्यूज चैनल औऱ बेव पोर्टल्स क कंटेट को लेकर अकसर विवाद रहता है. फिर वह चाहे न्यूज चैनल पर भारत में हुए आतंकी अटैक के दौरान चले लाइव हो या किसी वेबसाइट पर लिखी जाने वाली खबर.

वहीं अगर फेक न्यूज की बात की जाएं तो सरकार हो या विपक्ष या आम जनता सोशल मीडिया पर चलने वाली इन खबरों से हर कोई परेशान है. इसी कड़ी में भारत की सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कहा है कि नियामक तंत्र के अभाव में वेब पोर्टल्स और यूट्यूब चैनलों पर चलने वाले फेक न्यूज गंभीर चिंता का विषय है. 

कोर्ट ने कहा कि बिना किसी जवाबदेही के वेब पोर्टल पर ऐसी सामग्री परोसी जा रही है जो घाटक है. चीफ जस्टिस ने कहा कि इस देश में आजकल सब कुछ एक सांप्रदायिक कोण से दिखाया जाता है

बता दें कि मुख्य न्यायाधीश एनवी रमन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई कर रही थी, जिसमें केंद्र को मरकज निजामुद्दीन में एक धार्मिक सभा से संबंधित फर्जी समाचार के प्रसार को रोकने और सख्त कदम उठाने का निर्देश देने की मांग की गई थी। साथ ही इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई.

कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि निजी समाचार चैनलों के एक हिस्से में दिखाई जाने वाली लगभग खबरो में सांप्रदायिक रंग होता है। जिससे इस देश की बदनामी होने वाली है. साथ ही कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया केवल शक्तिशाली आवाजों को सुनता है और बिना किसी जवाबदेही के यहां तक न्यायाधीशों, संस्थानों के खिलाफ कई चीजें लिख देता है.

कोर्ट ने कहा है कि वेब पोर्टलों और यूट्यूब चैनलों में फेक न्यूज पर कोई नियंत्रण नहीं है. अगर आप यूट्यूब पर जाएं तो आप पाएंगे कि कैसे फर्जी खबरें आसानी से प्रसारित होती हैं और कोई भी यूट्यूब पर एक चैनल आसानी से शुरू कर सकता है. जिसके लिए कोई तय सीमा नहीं है.