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Old Age Pension Scheme: ताऊ देवीलाल को कहां से समझ आया था पेंशन का आइडिया, बुजुर्गों की कर दी थी बल्ले बल्ले

Navdeep Setia
22 Sep 2022 6:31 AM GMT
Old Age Pension Scheme: ताऊ देवीलाल को कहां से समझ आया था पेंशन का आइडिया, बुजुर्गों की कर दी थी बल्ले बल्ले
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देवीलाल को बुजुर्ग पैंशन का यह आइडिया अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान आया था। एक कार्यक्रम उन्हें पता चला कि अमेरिका में सीनियर सिटीजन के लिए इस्टेट यानी सरकार को कुछ वित्तीय प्रबंध करती है। दे

हरियाणा में चाहे चुनाव हों या न हों पैंशन सबसे प्रमुख मुद्दा रहता है। साल 1987 में चौधरी देवीलाल ने किसानों की कर्जा माफी और बुजुर्ग पैंशन को मुख्य चुनावी मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा था। 100 रुपए बुजुर्ग पैंशन का मुद्दा हरियाणा में इतना अधिक सफल हुआ कि देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल को 60 जबकि भाजपा को 16 सीटों पर जीत मिली। आजाद विधायकों और बसपा तथा सी.पी.आई. का समर्थन मिलाकर कुल 85 विधायक उनके पास थे। कांग्रेस को महज 5 सीटों पर जीत मिली थी।

देवीलाल को बुजुर्ग पैंशन का यह आइडिया अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान आया था। एक कार्यक्रम उन्हें पता चला कि अमेरिका में सीनियर सिटीजन के लिए इस्टेट यानी सरकार को कुछ वित्तीय प्रबंध करती है। देवीलाल जैसे ही 1987 में मुख्यमंत्री बने, उन्होंने पहली कलम से हरियाणा में बुजुर्गों को प्रति महीने 100 रुपए पैंशन देने की योजना लागू कर दी। उस समय हरियाणा पैंशन योजना लागू करने वाला देश का पहला प्रदेश था।

बाद में अन्य राज्यों ने भी इस योजना को लागू किया। उस समय हरियाणा में 8 लाख 40 हजार बुजुर्गों को पैंशन दी जाती थी। अब 17 लाख 41 हजार बुजुर्ग पैंशन योजना का लाभ ले रहे हैं। साल 2021 में पैंशन राशि 2500 रुपए तक पहुंच गई। हरियाणा में 1987 के बाद हुए तमाम विधानसभा चुनावों में पैंशन एक बड़ा मुद्दा रहा है। 1991, 1996, 2000, 2005, 2009, 2014 और 2019 केविधानसभा चुनावों में पैंशन का मुद्दा हमेशा से ही एक बड़ा चुनावी मुद्दा रहा है।

वक्त के साथ चुनावों में बेशक अन्य मुद्दे बदलते रहे, लेकिन पैंशन का मुद्दा हमेशा से ही सबसे बड़ा और प्रभावी मुद्दा रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा भी रहा है, जिस पर प्रत्येक सरकार पैंशन में वृद्धि करने को लेकर विवश रही है। 1 जुलाई 1991 को भजनलाल सरकार में बुढापा पैंशन की उम्र 65 से घटाकर 60 साल की गई। 1991 से 1999 के बीच पैंशन 100 रुपए से 200 कर दी गई। नवम्बर 2004 में 300 रुपए,

जबकि 1 मार्च 2009 को 700 रुपए कर दी गई। इसके बाद 1 जनवरी 2014 को 1 हजार रुपए, 1 जनवरी 2015 को 1200 रुपए, 1 जनवरी 2016 को 1400 रुपए, 1 नवम्बर 2016 को 1600 रुपए, 1 नवम्बर 2017 को 1800 रुपए, 1 नवम्बर 2018 को 2000 रुपए, 1 नवम्बर 2019 को 2250 रुपए और मार्च 2021 में 2500 रुपए की गई। हरियाणा में बजट का एक बड़ा हिस्सा भी पैंशन पर खर्च होता है।

पैंशन पर सालाना 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि खर्च होती है। वित्त वर्ष 2021-22 के अनुसार हरियाणा में 17 लाख 46 हजार 921 बुजुर्ग पैंशन योजना का लाभ ले रहे थे। हर विधानसभा चुनाव में यह बड़ा चुनावी वादा भी रहता है। साल 2000 का चुनाव इंडियन नैशनल लोकदल ने पैंशन को मुख्य आधार बनाकर लड़ा और इस मुद्दे का भी असर था कि राज्य में इनैलो की सरकार बनी। हरियाणा में पैंशन का मुद्दा इतना प्रभावी रहा है कि इसका असर चुनावों में साफ नजर आया, तो वहीं पैंशन को लेकर सरकारों की ओर से नारों व गीतों को भी तैयार करवाया गया। चौटाला

देवीलाल को अमेरिका में जाकर आया था पैंशन का आइडियासरकार ने पैंशन को लेकर कई गीत तैयार करवाए तो हुड्डा सरकार में 'कर दी मौज बुढ़ापे में, एक हजार का नोट बंद लिफाफे मेंÓ नारा चलन में आया तो 2018 में भाजपा सरकार ने जब पैंशन 2 हजार रुपए की तो उस समय 'कर दी मौज बुढ़ापे में, 1 नवम्बर से दो हजार सीधा खाते मेंÓ नारा दिया गया। जब देवीलाल ने साल 1987 में पैंशन योजना शुरू करने का ऐलान किया तो गांवों में बुजुर्गों ने नाच-गाकर खुशी का इजहार किया। यही नहीं बुजुर्गों ने मिठाई और लड्डू भी बांटे थे।

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