राजनीति

किरदार: जानिए हरियाणा की पहली महिला सांसद की कहानी जिन्होंने बंसीलाल को हराया!

Navdeep Setia
22 Sep 2022 1:19 PM GMT
किरदार: जानिए हरियाणा की पहली महिला सांसद की कहानी जिन्होंने बंसीलाल को हराया!
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हरियाणा की राजनीति में बड़ा किरदार रही चंद्रावती ने सियासत में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। वे हरियाणा से पहली महिला सांसद बनने में सफल रहीं। साल 1977 में भिवानी संसदीय सीट से चौधरी बंसीलाल को हराया।

हरियाणा की राजनीति में बड़ा किरदार रही चंद्रावती ने सियासत में कई रिकॉर्ड अपने नाम किए। वे हरियाणा से पहली महिला सांसद बनने में सफल रहीं। साल 1977 में भिवानी संसदीय सीट से चौधरी बंसीलाल को हराया। वे हरियाणा विधानसभा की पहली महिला विधायक बनने के अलावा 1982 से लेकर 1985 तक विधानसभा में विपक्ष की नेता भी रहीं।

खास बात यह है कि एक महिला लीडर के रूप में उन्होंने अपने सियासी जीवन में सबसे अधिक 14 चुनाव लड़े। पांच बार विधायक चुनी गई। पहली ऐसी महिला जो हरियाणा किसी बड़े क्षेत्रीय दल की भी प्रधान नहीं। यही नहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की पहली महिला वकील होने का रिकॉर्ड भी चंद्रावती के नाम है।

चंद्रावती को दो बार मंत्री परिषद में जगह मिली। वे 1964 से 1966 और फिर इसके बाद 1972 से 1974 तक मंत्री रहीं। उन्हें 1990 में पुडुचेरी का उपराज्‍यपाल बनाया गया था। वे इस पद पर फरवरी 1990 से दिसंबर 1990 तक रहीं। चंद्रावती का जन्म 1 सितम्बर 1928 को गांव भिवानी जिला के गांव दालावास में हुआ। चार साल की आयु में मां की मौत हो गईं।

कुछ अरसे बाद ही पिता भी चल बसे। कम उम्र में उनकी शादी कर दी गई, पर कम आयु होने के चलते वे अपने ससुराल नहीं गईं। किताबों और पढ़ाई में उनका मन लगता था। गांव से प्राइमरी शिक्षा लेने के बाद उन्होंने पिलानी के बिरला स्कूल में एडमिशन किया। बिरला स्कूल से मैट्रिक करने के बाद उन्होंने तीन साल तक यहां अध्यापक कार्य भी किया।

पंजाब के संगरुर से कलां संकाय में ग्रेजुएशन किया और दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी। कुछ समय वकालत की और 1954 में बाढड़ा से पहली बाार विधायक निर्वाचित हुईं। संयुक्त पंजाब के समय चंद्रावती 1954 और 1962-63 में संसदीय सचिव रही। 1965-66 में वे उपमंत्री बनीं तो साल 1972 से 1972 तक बंसीलाल की सरकार में राज्यमंत्री रहीं।

1977 से लेकर 1980 तक वे जनता पार्टी की प्रदेशाध्यक्ष रहीं। 1982 में हरियाणा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम करने का अवसर मिला। 1954 में पहली बार विधायक निर्वाचित होने के बाद साल 1957 में दादरी सीट से चुनाव में पराजित हो गईं। 1962 में चंद्रावती ने दादरी से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

चंद्रावती ने 21155 वोट हासिल करते हुए माकपा के धर्मङ्क्षसह को 6433 वोटों के अंतर से हराया। 1967 में बाढड़ा सीट से आजाद प्रत्याशी आजाद ङ्क्षसह से हार गईं। 1968 में लोहारु से 14,480 वोट लेते हुए तुलसीराम को 1498 वोटों से हराया। 1972 में फिर से लोहारुप से विधायक चुनीं गई और बंसीलाल की सरकार में मंत्री रहीं।

1977 में उन्हें पार्टी की कमान सौंपी गई। 1977 के चुनाव में जनता पार्टी ने रिकॉर्ड 75 सीटों पर जीत दर्ज की। 1982 में चंद्रावती ने दादरी विधानसभा सीट से 21905 वोट लेते हुए कांग्रेस के अत्तर ङ्क्षसह को 1097 वोटों के अंतर से हराया। 1987 में लोकदल ए से चुनाव लड़ा पर कामयाबी नहीं मिलीं। 1991 के विधानसभा चुनाव में फिर से विधायक निर्वाचित हुईं।

वे बंसीलाल की सरकार में दो बार मंत्री रहीं। बंसीलाल के साथ उनके सैद्धांतिक मतभेत रहे। साल 1970 में बंसीलाल ने उन्हें मंत्रीपद से हटा दिया था। बंसीलाल की सरकार में काम करने के बाद चंद्रावती की सियासत में एक ऐसा दौर भी आया जब उन्होंने बंसीलाल के गृह क्षेत्र में ही उनके खिलाफ बगावत का बिगुल बजा दिया।

संयुक्त पंजाब के समय से राजनीति में सक्रिय और बंसीलाल से अनुभवी चंद्रावती चौधरी देवीलाल के पाले में आ गईं। साल 1977 के संसदीय चुनाव में चंद्रावती ने भिवानी लोकसभा सीट से चुनावी ताल ठोक दी। उस चुनाव में चंद्रावती ने करीब 2 लाख 90 हजार वोट लेते हुए चौधरी बंसीलाल को 1 लाख 61 हजार के अंतर से चुनाव हरा दिया।

दो बार हरियाणा के सीएम और केंद्र में रक्षा मंत्री रह चुके बंसीलाल के लिए यह हार सदमे से कम नहीं थीं। साल 1977 से 1980 तक जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में काम करने के बाद साल 1982 से 1987 तक चंद्रावती ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपनी गहरी छाप हरियाणा की सियासत पर छोड़ी। 19 फरवरी 1990 से लेकर 18 दिसम्बर 1990 तक चंद्रावती पांडेचेरी की राज्यपाल रहीं। नवम्बर 2020 में हरियाणा की इस महान महिला लीडर का निधन हो गया।

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