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मरे हुए चिकन में ‘जान’ डालकर दो दोस्तों ने खड़ी की अरबों की कंपनी
 

Licious Company Success Story

नॉनवेज के शौकीन लोगों की पहली पसंद अगर पूछी जाए तो उनका जवाब होगा लीशियस। लीशियस बेंगलुरु की एक कंपनी है जो मीट और सीफूड को आपके किचन तक पहुंचाती है।

हाल ही में इस कंपनी को 52 मिलियन डॉलर की फंडिंग प्राप्त हुई है। इसी फंडिंग के साथ कंपनी भारत के यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो गई है।

आज हम आपको बताएंगे कि कैसे मरे हुए चिकन में जान डालने वाली कंपनी आज करोड़ों का कारोबार कर रही है।


 

अव्यवस्थित सेक्टर को किया व्यवस्थित-

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, भारत में लगभग 73 प्रतिशत लोग मांसाहारी है। भारत में लोग हर तरह के ब्रांड्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अब तक मीट का कोई ब्रांड नहीं था।

भारत में मीट मार्केट कभी व्यवस्थित नहीं रही। हर शहर में अलग-अलग कसाई-खाने या मीट की दुकानें देखी जा सकती हैं लेकिन वे न तो किसी ब्रांड के अंडर आती हैं और ना ही उनके ऊपर कोई क्वालिटी चेक होता है।

मीट के ग्राहक की इसी परेशानी का हल निकाला दो दोस्त, अभय हंजुरा और विवेक गुप्ता ने। उन्हें लगा कि इस स्पेस में काम किया जा सकता है, जो कि आगे चलकर एक बड़ा बिजनेस बन सकता है। हालांकि विवेक गुप्ता पहले इसके लिए राजी नहीं थे, मगर अभय हंजुरा ने उन्हें मना लिया।


 

विवेक के मन में थी ये शंकाएं-

विवेक गुप्ता को मास के बिजनेस को लेकर दो शंकाएं थी। पहली यह कि वह ऐसे परिवार से आते हैं, जहां कोई मांस का सेवन नहीं करता था। विवेक ने अमेरिका में नौकरी करने के दौरान मीट खाना शुरू किया था। ऐसे में उनके मन में था कि वह ऐसा काम शायद नहीं कर पाएंगे, परिवार वाले भी शायद सपोर्ट न करें।

दूसरी शंका ये थी कि अगर ये मार्केट 30-40 बिलियन डॉलर की है, तो फिर अभी तक किसी और ने इस पर काम क्यों नहीं किया?

मरे हुए चिकन में डाल दी जान-

अभय और विवेक एक दिन लंच करते हुए अपना बिजनेस आइडिया डिस्कस कर रहे थे। उनके लंच में जो आया था उसकी क्वालिटी बेहद खराब थी। तब विवेक ने कहा यदि हमें कुछ अलग करना है तो हमें मरे हुए चिकन में जान डाल देनी होगी।

बस, यहीं से फैसला लिया गया कि लिशियस के जरिए लोगों को बेहतरीन क्वालिटी का मीट देना है और इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। तब 2015 में दोनों ने बेंगलुरु में अपनी कंपनी की शुरूआत की।
 

कैसे काम करती है कंपनी-

लिशियस का बिजनेस मॉडल है फार्म टू फॉर्क (फार्म से सीधा प्लेट में)। कंपनी पूरी सप्लाई चेन को खुद हैंडल करती है। फार्म से माल उठाने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग, स्टोरेज और पैकेजिंग से लेकर ग्राहक तक पहुंचाने का काम भी कंपनी खुद देखती है।

कंपनी जो भी मीट पैक करती है वह साफ-सुथरा और साइंटिफिक तरीके से पैक किया होता है। कंपनी दावा करती है कि आपके ऑर्डर करने के बाद 90-120 मिनट के अंदर पैकेज की डिलिवरी करवा दी जाती है।


 

कर्मचारियों की परवाह करने वाली कंपनी-

अभय और विवेक कहते हैं कि उन्होंने पहले दिन से जो भी लोग अपने साथ जोड़े, वे कर्मचारी न होकर हमारे शेयरहोल्डर्स हैं। उनका मानना है कि इस सेक्टर में बदलाव लाने के लिए एक साथ काम कर रहे लोगों का भरोसा सबसे बड़ी चीज है।