हरियाणा में फॉयर ऑपरेटर की नौकरी पाने के लिए खरीदे फर्जी सर्टिफिकेट, ऐसे खुला राज

 
 हरियाणा में फॉयर ऑपरेटर की नौकरी पाने के लिए खरीदे फर्जी सर्टिफिकेट, ऐसे खुला राज
हरियाणा के फॉयर ब्रिगेड विभाग में फॉयर ऑपरेटर की पोस्ट हासिल करने के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किए। 50-50 हजार रुपये देकर ये सर्टिफिकेट बनवाए गए। 

हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की स्क्रीनिंग के दौरान इसका खुलासा हुआ था और इसी वजह से फर्जी सर्टिफिकेट वाले युवाओं का नौकरी में चयन नहीं हो सका। कुल 2100 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन 800 ही योग्य युवा इस पद के लिए मिल सके।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा ग्रुप-सी के पदों पर लगाई गई रोक हटाने के बाद आयोग द्वारा विगत दिवस नतीजे घोषित किए गए थे। ग्रुप-सी यानी तृतीय श्रेणी के 10 हजार 233 पदों का रिजल्ट आयोग ने घोषित किया था। इनमें 800 फॉयर ऑपरेटर भी शामिल थे। 

इन पदों के लिए आवेदन करने वाले दूसरे अभ्यर्थियों के विरोध व आपत्ति के बाद आयोग ने फिलहाल के लिए चयनित युवाओं की ज्वाइनिंग रोक दी है। साथ ही, आयोग ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि चयनित युवाओं के दस्तावेजों में किसी तरह की गड़बड़ नहीं है।

800 चयनित उम्मीदवारों को छोड़कर 10 विभागों में ग्रुप-सी के विभिन्न पदों के लिए चयनित उम्मीदवारों की ज्वाइनिंग प्रक्रिया शुरू कर दी है।

दरअसल, अग्निशमन विभाग में फॉयर ऑपरेटर पद पर चयनित होने से वंचित रह गए युवाओं ने आरोप लगाया कि आयोग ने रिजल्ट में धांधली की है। बड़ी संख्या में उम्मीदवार पंचकूला स्थित आयोग मुख्यालय भी पहुंचे। वे मंगलवार रात से ही आयोग कार्यालय के बाहर डटे हुए थे।

आयोग ने ऐसे सभी आवेदकों की लिखित में आपत्तियां हासिल की। करीब 600 युवाओं को अग्निशमन विभाग के रिजल्ट पर आपत्ति जताई। 600 आपत्तियों में से करीब 500 की जांच की जा चुकी है और बाकी की जांच प्रक्रिया चल रही है। 

आवेदकों का कहना है कि उनके नंबर अधिक थे, लेकिन कर्मचारी चयन आयोग ने कम नंबरों वालों को नियुक्तियां दी हैं। आयोग की साइट पर उनके डाक्यूमेंट भी प्रदर्शित नहीं हो रहे हैं। अपनी इस बात पर अड़े सैकड़ों अभ्यर्थियों ने कर्मचारी चयन आयोग की भूमिका पर सवाल खड़े किए। 

जांच में पाया कि कई अभ्यर्थियों ने फर्जी सर्टिफिकेट लगाए हुए थे। पता लगा है कि ये सर्टिफिकेट 50-50 हजार रुपये में बनवाए गए। इन अभ्यर्थियों ने फार्म अलग तारीख में भरा और दस्तावेज अलग तारीख में लगाए। कुछ अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन में पोस्ट का नाम नहीं भरा तो कुछ ने सर्टिफिकेट जाली होने की वजह से उन्हें अपलोड नहीं किया और अपने पास इस दावे के लिए रख लिया कि इन सर्टिफिकेट का बाद में इस्तेमाल किया जाएगा।