Fake Products: बाजार में है नकली सामानों की भरमार, सोच-समझकर सामानों का चयन करें खरीददार

देशभर में कई आवेद काम चल रहे है इनमे से एक है नकली सामानों (Fake Products) की घुसपैठी। सरकार अभी तक बहुत चीज़ो पर कदम उठा चुकी है।
 

Fake Products: देशभर में कई आवेद काम चल रहे है इनमे से एक है नकली सामानों (Fake Products) की घुसपैठी। सरकार अभी तक बहुत चीज़ो पर कदम उठा चुकी है। चाहे वह गोल्ड (Gold) हो या मोबाइल (Mobile) की स्मगलिंग हो इन पर रोक लगाने के लिए कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन नकली सामानों को रोकने के लिए अभी तक कोई असरदार योजना अमल में नहीं आई है। 

ऐसे में इस बार के बजट (Budget-2023) में सरकार से उम्मीद है कि वो देश की अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को नुकसान पहुंचाने वाले इस गंभीर खतरे के लिए कोई उपयुक्त कदम उठाएगी.

2.6 लाख करोड़ का है 'नकली' का बाजार

ये खतरा कितना बड़ा है इसका अनुमान क्रिसिल (Crisil) और आथेंटिकेशन साल्यूशन प्रोवाइडर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है. इनके मुताबिक देश में बेचे जाने वाले सभी उत्पादों में से 25 से 30 फीसदी नकली होते हैं. 

2019-20 में नकली सामानों का बाजार 2.6 लाख करोड़ रुपये का था और ये लगातार बढ़ता जा रहा है. नकली सामानों की सबसे ज्यादा समस्या कपड़ों और एफएमसीजी के सेक्टर (FMCG Sector) में है. इसके बाद फार्मा (Pharma), आटोमोटिव (Automative) और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) में भी नकली सामानों की समस्या है.  

फेक मार्केट में नकली कपड़ों का बोलबाला!

अगर अलग-अलग सेक्टर्स की बात करें तो 31 फीसदी के साथ नकली उत्पादों के मामले में कपड़ों का सेगमेंट पहले नंबर पर आता है. इसके बाद 28 फीसदी के साथ FMCG और 25 फीसदी के साथ ऑटोमोटिव का नंबर आता है. जहां ग्राहकों को खरीदारी करते समय नकदी उत्पाद मिल जाते हैं. 

इसके अलावा भी कई ऐसे सेगमेंट्स हैं, जहां पर नकली प्रोडक्ट्स की समस्या सबपर भारी पड़ती है. इनमें फार्मास्यूटिकल्स 20 फीसदी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 17 परसेंट और एग्रोकेमिकल्स 16 फीसदी नकली सामानों के साथ शामिल है. 

जागरुकता के अभाव से मिल रहा सपोर्ट

एक समस्या यहां पर जागरुकता की भी है. रिपोर्ट के मुताबिक, कम से कम 27 फीसदी ग्राहक इस बात से अनजान हैं कि जो प्रॉडक्ट्स वे खरीद रहे हैं, वो असल में नकली है. हालांकि, 31 फीसदी लोग जानते हुए या फिर परख करते हुए नकली सामान खरीद लेते हैं. 

इस रिपोर्ट में जिन 12 शहरों को शामिल किया गया है, उनमें दिल्ली, आगरा, जालंधर, मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, इंदौर, कोलकाता, पटना, चेन्नई, बेंगलुरु और हैदराबाद शामिल हैं.

जीरा से खाद्य तेल तक नकली की घुसपैठ

क्रिसिल मार्केट इंटेलिजेंस एंड एनालिटिक्स (Crisil Market Intelligence And Analytics) के मुताबिक नकली सामान केवल लग्जरी प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं है. 

हर घर की रसोई में रोजाना इस्तेमाल होने वाले जीरे से लेकर खाना पकाने के तेल और बच्चों की देखभाल के सामान से लेकर दवाओं तक नकली सामानों की घुसपैठ लगातार बढ़ती जा रही है.