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सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की शान और पहचान है सुखना लेक, यहां पर है सुसाइड टॉवर भी

Navdeep Setia
22 Sep 2022 6:30 AM GMT
सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की शान और पहचान है सुखना लेक, यहां पर है सुसाइड टॉवर भी
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चंडीगढ़ देश के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। सिटी ब्यूटीफुल में सैर-सपाटे के लिहाज से बेशुमार जगह हैं। रॉक गार्डन, रोज गार्डन और पिंजौर गार्डन है। पर सही मायने में चंडीगढ़ की शान है सुखना लेक। इसे चंडीगढ़ का दिल कहा जा सकता है।

चंडीगढ़ देश के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक है। सिटी ब्यूटीफुल में सैर-सपाटे के लिहाज से बेशुमार जगह हैं। रॉक गार्डन, रोज गार्डन और पिंजौर गार्डन है। पर सही मायने में चंडीगढ़ की शान है सुखना लेक। इसे चंडीगढ़ का दिल कहा जा सकता है।

आप घूमने के इरादे से चंडीगढ़ आए तो सूखना लेक पर नहीं गए तो आपनी चंडीगढ़ की यात्रा अधूरी रह जाती है। सूखना लेक पर आप बोटिंग कर सकते हैं। कैमल सफारी का मजा ले सकते हैं। यहां पर आप अच्छे लंच और ब्रेकफास्ट को एन्जाय कर सकते हैं। शिवालिक पहाडिय़ों की तलहटी में यह झील है। इसका दृश्य आपका मन मोह लेता है। खूबसूरत शहर की एक खूबसूरत झील की कहानी पर एक नजर।

दरअसल सूखना लेक का निर्माण साल 1958 में किया गया। उस समय तीन किलोमीटर के क्षेत्र में बरसाती झील सूखना चोअ को बांध कर बनाई गई थी। पहले इस झील में बरसाती पानी गिरता था। ऐसे में इसमें गार जमा हो जाती थी। इस समस्या के हल के लिए ही करीब 25 किलोमीटर भूमि का अधिग्रहण किया गया। यहां पर पेड़ लगाए गए।

साल 1974 में सूखना चोअ के पानी का रुख दूसरी तरफ मोड़ दिया गया। इसके बाद यहां पर बोटिंग शुरू की गई। कुछ कैफे बनाए गए। इस लेक पर काफी सेल्फी प्वाइंट भी हैं। वीकैंड पर यहां काफी भीड़ रहती है। इस झील के किनारे कई फिल्मों और वीडियोज की शूटिंग हो चुकी है। सूखना लेक पर एक टॉवर भी है। इसे सुसाइड टॉवर कहा जाता है।

काफी समय पहले लोग इस टॉवर पर चढ़कर सूखना झील में कूदकर आत्महत्या कर लेते थे। तभी इसका नाम सुसाइड टॉवर है। फिलहाल इस टॉवर का इस्तेमाल लेक में पानी का लेवल मापने के लिए किया जाता है। पहाड़ों की लंबी शृंखला सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की शान और पहचान है सुखना लेक, यहां पर है सुसाइड टॉवर भी के बीच सुखना लेक का दृश्य आपका मन मोह लेता है। गर्मियों के मौसम में यहां बेशुमार प्रवासी पक्षी आते हैं।

आपको लेक में बत्तखें भी देखने को मिलेंगी।अब आप सोच रहे होंगे कि पीपल का पेड़ तो हर जगह होता है तो फिर सुखना लेक के पास स्थित पीपल के पेड़ में क्या खास है? तो बता दें कि यह चंडीगढ़ का सबसे पुराना पेड़ है। माना जाता है कि यह पेड़ वहां पर तब से है, जब चंडीगढ़ भी नहीं था। हिमालय की शिवालिक पहाडयि़ों की तलहटी में स्थित सुखना लेक को 1958 में सुखना चोइ को बांधकर बनाया गया था।

सूखना लेक के किनारे एक पीपल का पेड़ भी है। यह आम पेड़ नहीं है। यह खास पेड़ है। जब चंडीगढ़ को बसाया भी नहीं गया था, उससे पहले से यह पेड़ है। इस लेक का कुदरती सौंदर्य फोटोग्राफर्स और पेंटरों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह झील स्कीइंग, सर्फिंग और वॉटर स्पोर्टस प्रतिविधियों के लिए लोकप्रिय है। एशिया के सबसे लम्बे रोइंग और याटिंग चैनल के रूप में भी यह मशहूर है।

सुखना झील में एशियन रोइंग चैम्पियनशिप का भी आयोजन किया जाता है। इस लेक पर आप पिकनिक, बोटिंग और मेडिटेशन के लिए जा सकते हैं। झील में बोट राइड गतिविधियों के अलावा आप शिकारा की सवारी भी एन्जॉय कर सकते है। लेक का वेट लैंड एरिया 565 एकड़ में फैला हुआ है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 10,395 एकड़ में है। एक गोल्फ कोर्स और प्रसिद्ध रोज गार्डन से घिरी सूखना झील मछली और साइबेरियाई बत्तख व के्रन जैसे प्रवासी पक्षियों का भी धर है।

यदि आप थकान भरी लाइफ से दूर कुछ समय अपनी फैमली के साथ रिलेक्स करते हुए बिताना चाहते हैं तो आपको पूरे एक दिन के लिए इस झील पर जाना चाहिए। यकीन मानिए इस लेक के मनोहर और अनूठे दृश्य आपको तरो-ताजा कर देंगे।

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