पिता के सपने को बेटे ने किया पूरा, देश सेवा के लिए मुनीष ने छोड़ी कांस्टेबल की नौकरी, अब सेना में होंगे लेफ्टिनेंट
 

पिता की प्रेरणा और देश भक्ति की भावना से ओतप्रोत होकर गांव किरढ़ान के 25 साल के मुनीष देश सेवा के लिए हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी छोड़ दी। मुनीष अब भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर सेवाएं देंगे। भारतीय सेना में अधिकारी के तौर पर चयन होने से परिवार के साथ-साथ गांव में जश्र का माहौल है।

मुनीष के पिता सूबेदार मेजर कृष्ण कुमार फर्स्ट पैरा स्पैशल फोर्स यूनिट हिमाचल प्रदेश में नियुक्त हैं। सूबेदार मेजर कृष्ण कुमार ने बताया कि उन्होंने भारतीय सेना में सिपाही के तौर पर अपनी सेवा शुरू की थी। भारत माता की सेवा करते हुए उन्होंने सपना देखा कि उनका बेटा उनसे भी बड़ा अधिकारी बनकर देश की सेवा करें। इसी सपने को मन में संजोए सूबेदार मेजर कृष्ण कुमार ने बेटे मुनीष को शुरुआत से भारतीय सेना के लिए तैयार करना शुरू कर दिया।

शुरुआती शिक्षा हिमाचल प्रदेश के आर्मी पब्लिक स्कूल, नाहन से हुई। इसके बाद 5वीं कक्षा में अजमेर के मिल्ट्री स्कूल में प्रवेश पाया और कक्षा 12वीं तक शिक्षा हासिल की। कक्षा के साथ-साथ एनसीसी में प्रमुख रूप से भागीदारी की। इसके बाद आदमपुर के एफजीएम कालेज से बीएससी उत्तीर्ण की।

कड़ी मेहनत की बदौलत मिला मुकाम

मुनीष ने बताया कि उसका एकमात्र उद्देश्य अपने पिता के सपने को साकार करना था। इसके लिए उसने प्रतिदिन 12 से 14 घंटे पढ़ाई शुरू की। 2017 में हरियाणा पुलिस में कांस्टेबल के तौर पर चयन हो गया। पुलिस की डयूटी के साथ-साथ अपनी सेल्फ स्टडी को भी जारी रखा। मुनीष ने बताया कि उसकी ड्यूटी हरियाणा पुलिस के हैड क्वार्टर पंचकूला की साइबर सैल ब्रांच में थी। डयूटी के दौरान सहयोगियों व अधिकारियों ने उसका भरपूर सहयोग मिला।

ऑलओवर पॉजिशन रही शानदार, मिला मेडल

मुनीष ने बताया कि फरवरी 2020 में लिखित परीक्षा पास होने के बाद सर्विस स्लेक्शन बोर्ड के इंटरव्यू क्वालिफाई होने के बाद 7 जनवरी 2021 को ऑफिसर ट्रेनिंग अकेडमी, चेन्नई ज्वाईन की. ट्रेनिंग के दौरान विभिन्न मापदंडों के आधार पर मुनीष ने देशभर में टॉप किया और ऑफिसर ट्रेनिंग में तृतीय स्थान हासिल किया।

परिवार को बधाई देने वालों का लगा तांता, जश्न का माहौल

वैसे तो परिवार भारतीय सेना के प्रति समर्पित है। लेकिन जो मुकाम मुनीष ने हासिल किया है, वो अभी तक परिवार में किसी ने हासिल नहीं किया है। इस उपलब्धि के बाद गांव के लोग व रिश्तेदार घर आकर मुनीष के साथ मुनीष के परिवार को भी बधाई दे रहे हैं।