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कई लोग कान में बिना वजह खुजली करते रहते हैं। अगर आप भी कान में उंगली, माचिस की तीली या फिर चाबी डालते हैं तो आपको पता भी नहीं है कि आप कितनी बड़ी समस्या में पड़ सकते हैं। अगर लगातार कान में खुजली की दिक्कत हो रही है तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

अगर आप भी कान में उंगली, माचिस की तीली या फिर चाबी डालकर खुजली को शांत करते हैं या फिर उनकी सफाई करते हैं तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। आमतौर पर आपने सुना होगा कि बारिश के दिनों में खांसी, जुकाम या गले में दर्द जैसी काफी समस्या होती हैं, लेकिन कानों में होने वाला फंगल इंफेक्शन भी बारिशों के दिनों में होनी वाली बीमारियों में से एक है। हालांकि लोग इस तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देते और खुद ही कान में तिली डालकर उसका इलाज करते हैं। कैसे होता है यह फंगल इंफेक्शन, किन चीजों से बचना चाहिए, आइए देखते हैं…

क्यों होता है कानों में फंगल इंफेक्शन

अधिक गर्मी या उमस के कारण कानों में नमी बन जाती है। इससे कानों में खुजली होने लगती है। कानों में खुजली होने पर लोग डॉक्टर के पास जाने के बजाय उसमें गर्म तेल डाल लेते हैं। तीलिया डालते हैं या फिर बाइक-स्कूटर की चाबी कान में घुमाते हैं, इससे खुजली वाली जगह पर घाव बन जाता है। वह घाव धीरे-धीरे फंगल इंफेक्शन में बदल जाता है। इसके साथ ही कान में चोट लगना, कान में कीड़े के काटने, मैल का बढ़ जाना, नहाते हुए कान में पानी चले जाना और शरीर में पोषक तत्वों की कमी होना भी फंगल इंफेक्शन के कारण हो सकते हैं।

क्यों बह रहा है कान

अक्सर जब कभी लोगों का कान बहने लगता है, तो वह दवा की दुकान पर जाकर ड्रॉप्स ले लेते हैं। बिना इस वजह को जाने कि उनके कान का पर्दा फटने की वजह से बह रहा है या फिर फंगस की वजह से। दोनों ही परिस्थितियों में अलग-अलग तरह के ड्रॉप्स का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन वजह न जानने बगैर दवा डालने से कान की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो जाती है। यहां तक कि कान का पर्दा भी फट सकता है, इसलिए कान में कोई भी समस्या होने पर ईएनटी स्पेशलिस्ट को ही दिखाना चाहिए।

 बाहर से न करवाएं कान साफ

सड़कों पर कान साफ करने वालों को घूमते देखा होगा, जो हाथ में सलाई पकड़कर कान की सफाई करते हैं, जिनसे कान की सफाई कराना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। ये लोग एक ही सलाई का इस्तेमाल कई लोगों के कानों में करते हैं, इससे भी इंफेक्शन तेजी से फैलता है। इसके साथ ही यह लोग कानों के अंदर तक सिलाई डालते हैं, जिससे कान के पर्दे फट सकते हैं। ऐसे कई केस अस्पताल में आते हैं, जिसमें कान की गलत तरीके से सफाई के दौरान पर्दे फट जाते हैं।

 हर 10 में से 4 पेशंट फंगल इंफेक्शन के

अस्पताल में कानों से संबंधित जितने केस आते हैं, उनमें हर 10 में से करीब 4 केस ऐसे होते हैं, जिनके कानों में फंगल इंफेक्शन होता है। बरसात के दिनों में यह केस और भी बढ़ जाते हैं। इसमें भी ज्यादातर केस युवाओं के ही होते हैं। युवाओं में इन दिनों कान की समस्या तेजी से बढ़ रही है। फिर चाहे बात फंगल इंफेक्शन की हो या बहरेपन की। 

ऐसे करें बचाव

-कान में किसी तरह की चीज ना डालें और कान से छेड़खानी न करें।

 

-स्विमिंग करते वक्त ईयर प्लग्स का इस्तेमाल करें।

 

-अगर पहले कभी इंफेक्शन हो चुका है, तो कानों में मोटी रुई या फिर ईयर प्लग्स का इस्तेमाल करें।

 

-अगर बार-बार फंगल इंफेक्शन होता है, तो डायबीटीज जरूर चेक करवाएं क्योंकि डायबिटिक पेशंट को यह इंफेक्शन होता रहता है।

 

-कानों में गर्म तेल न डालें।

 

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