हरियाणा

बोझा ढोने वाला यह जानवर हरियाणा में हो रहा है गायब। भावी पीढ़ी को किताबों में होंगे दीदार

Navdeep Setia
22 Sep 2022 6:45 AM GMT
बोझा ढोने वाला यह जानवर हरियाणा में हो रहा है गायब। भावी पीढ़ी को किताबों में होंगे दीदार
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गधा एक ऐसा जानवर है जिस पर सबसे अधिक कहावतें और मुहावरें हैं। एक मुहावरा है ये गायब हो गए जैसे गधे के सर से सींगÓ। पर बोझा ढोने के काम आने वाला यह जानवर ही हरियाणा से गायब हो रहा है।

गधा एक ऐसा जानवर है जिस पर सबसे अधिक कहावतें और मुहावरें हैं। एक मुहावरा है ये गायब हो गए जैसे गधे के सर से सींगÓ। पर बोझा ढोने के काम आने वाला यह जानवर ही हरियाणा से गायब हो रहा है।

पिछले आठ बरस में गधों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है। पशुपालन विभाग की ओर से हर पांच साल के अंतराल पर की जाने वाली पशुगणना में पिछले करीब आठ साल में गधों की संख्या 2200 तक कम हो गई है।

2020 पशुगणना के अनुसार अब हरियाणा में 800 गधे रह गए हैं। 2007 में इनकी संख्या 4838 जबकि 2012 में तीन हजार के करीब थी। अम्बाला, कैथल, सोनीपत व पानीपत में तो गधों की सं या दहाई के आंकड़े से नीचे खिसक गई है। इन चार जिलों में 19 गधे ही रह गए हैं। गधे की नस्ल से ही मेल खाने वाले खच्चरों की संख्या भी तेजी से कम हो रही है। 2007 में प्रदेश में10,600 खच्चर थे। अब महज 2500 खच्चर ही बचे हैं। पशुगणना में गधों की गाथा पर आधारित यह रोचक रिपोर्ट:

दरअसल जैसे-जैसे शहरीकरण हो रहा है और तरह-तरह के साधन और संसाधन आ रहे हैं, उसी के चलते अब गधों, टट्टू व खच्चरों का इस्तेमाल कम होने लगा है। यही वजह है कि अब लोगों ने इन जानवरों को पालना छोड़ दिया है।

पशुपालन विभाग क पशुगणना रिपोर्ट के अनुसार अम्बाला में 3, कैथल व पानीपत में 6-6 जबकि सोनीपत में 4 गधे रह गए हैं। 2007 की पशुगणना के अनुसार प्रदेश में 4838 जबकि 2012 गधों की संख्या 3 हजार के करीब थे।

जिलावार बात करें तो सिरसा में गधों की संख्या में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। 2007 में 547 गधे थे और अब संख्या 80 रह गई है। इसी के साथ खच्चरों की संख्या में तो और अधिक तेजी से गिरावट दर्ज की गई है।

2007 की पशुगणना के अनुसार राज्य में 10,600 खच्चर थे और अब इनकी संख्या 2500 रह गई है और इस लिहाज से इनकी संख्या में 8100 की कमी आई है। खास बात यह है कि राज्य में एक भी ऐसा जिला नहीं है जहां गधों की संख्या तीन अंकों में हो।

वैसे कुल मिलाकर देखें तो प्रदेश में पिछले 8 बरस में भैंसों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। 2007 की पशुगणना के अनुसार प्रदेश में भैंसों की संख्या 59 लाख 53 हजार 228 थी जो हालिया पशुगणना में 43 लाख 76 हजार 644 रह गई है।

इस लिहाज से भैंसों की संख्या में 15 लाख 76 हजार 594 कमी आई है। इसकी प्रमुख वजह नगरीकरण का बढऩा है तो दूसरी वजह है अब अन्य प्रदेशों में भी बड़ी सं या में भैंसों की बिकवाली यहां से हो रही है।

प्रदेश में 2007 की पशुगणना के अनुसार 15 लाख 52 हजार 361 गऊएं थीं, जबकि हाल की पशुगणना के अनुसार अब गायों की संख्या 19 लाख 32 हजार 39 हो गई है। जिलावार देखें तो सिरसा में सवा्रधिक 2 लाख 35 हजार 775 गाय हैं जबकि सबसे अधिक 4 लाख 26 हजार 486 भैंसें हिसार जिला में है। खैर बोझा ढोने के काम आने वाला जानवर गधा शहरीकरण और आधुनिकता के चलते गायब हो रहा है। इस जानवर को लोगों ने अब पालना छोड़ दिया है।

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