किसानों और सरकार के बीच बातचीत रही बेनतीजा, दिल्ली कूच पर अडिग किसान, आज कई जिलों में इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू

 
breaking
WhatsApp Group Join Now
 

चंडीगढ़ ब्रेकिंग 

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने की मीडिया से बात, कहा किसान संगठनों के साथ हमारी बातचीत हुई

बातचीत के जरिए हर समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। सरकार भी यही चाहती है कि बातचीत के जरिए समस्याओं का हल निकल जाना चाहिए।

इसीलिए हम सरकार के प्रतिनिधि बनकर यहां आए थे। किसान संगठनों के साथ बैठक में सभी मुद्दों पर चर्चा हुई।

मीटिंग में सभी विषयों पर चर्चा हुई और ज्यादातर विषयों पर सहमति तक बात पहुंची।

लेकिन कई बिंदु ऐसे थे जिनके स्थाई समाधान के लिए कमेटी बनाकर उसे पर काम किया जाना जरुरी है।  उसमे सभी बातें को शामिल किया जाना चाहिए।

हम अभी भी आशा करते हैं कि बातचीत आगे भी होगी और सब बातों का हल निकलेगा।  हमारा लक्ष्य है किसानो और जन सामान्य के हितों की रक्षा करना है। 

आगामी दिनों में भी समाधान की कोशिश जारी रहेगी

चंडीगढ़ में सोमवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अर्जुन मुंडा के साथ किसान संगठनों की साढ़े पांच घंटे की बैठक बेनतीजा रही. किसानों का कहना है कि उनका दिल्ली कूच जारी रहेगा. किसान एमएसपी पर किसी भी कीमत पर समझौता करने को तैयार नहीं है. किसानों का कहना है कि सरकार उनकी मांग पर गंभीर नहीं है.

किसान मजदूर मोर्चा का कहना है कि सरकार हमारी मांगों पर गंभीर नहीं है. सरकार के मन मे खोट है, वे हमें कुछ नहीं देना चाहते. किसान मंगलवार सुबह 10 बजे से आगे बढ़ेंगे. किसानों ने 16 फरवरी को भारत बंद भी बुलाया है.

दिल्ली पुलिस की इंटेलिजेंस रिपोर्ट के मुताबिक, 13 फरवरी के 'दिल्ली चलो मार्च' में लगभग 20 हजार किसान 2500 ट्रैक्टर्स से दिल्ली पहुंच सकते हैं. हरियाणा और पंजाब के कई बॉर्डर एरिया में प्रदर्शनकारी मौजूद हैं. ये प्रदर्शनकारी दिल्ली में दाखिल होने को तैयार हैं. किसान प्रदर्शनकारी छोटी-छोटी टुकड़ियों में ट्रैक्टर और ट्रॉली के साथ मौजूद हैं.

अब आपको बताते हैं कि सरकार और किसानों के बीच इन मांगों पर बातचीत हुई. किसान मजदूर मोर्चा (KMM) और संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के मांग पत्र के मुताबिक,

1) सभी फसलों की खरीद पर MSP गारंटी अधिनियम बनाया जाए. डॉ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश पर सभी फसलों के उत्पादन की औसत लागत से पचास फीसदी ज्यादा एमएसपी मिले.

1.1) गत्ते का एफआरपी और एसएपी स्वामीनाथन आयोग के फार्मूले के अनुसार दिया जाना चाहिए, जिससे यह हल्दी सहित सभी मसालों की खरीद के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण बन जाए.

2) किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ हो.

3) पिछले दिल्ली आंदोलन की अधूरी मांगें जैसे कि-

3.1) लखीमपुर खीरी हत्या मामले में न्याय हो, अजय मिश्रा को कैबिनेट से बर्खास्त किया जाए और गिरफ्तार किया जाए, आशीष मिश्रा की जमानत रद्द की जाए. सभी आरोपियों से उचित तरीके से निपटा जाए.

3.2) समझौते के अनुसार, घायलों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए.

3.3) दिल्ली मोर्चा सहित देशभर में सभी आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे रद्द किए जाएं.

3.4) आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों और मजदूरों के परिवारों को मुआवजा दिया जाए और नौकरी दी जाए.

3.5) दिल्ली में किसान मोर्चा के शहादत स्मारक के लिए जगह दी जाए.

3.6) बिजली क्षेत्र को निजी हाथों में देने वाले बिजली संशोधन विधेयक पर दिल्ली किसान मोर्चा के दौरान सहमति बनी थी कि इसे उपभोक्ता को विश्वास में लिए बिना लागू नहीं किया जाएगा, जो कि अभी अध्यादेशों के माध्यम से पिछले दरवाजे से लागू किया जा रहा है, इसे निरस्त किया जाना चाहिए.

3.7) कृषि क्षेत्र को वादे के अनुसार प्रदूषण कानून से बाहर रखा जाना चाहिए.

4) भारत को डब्ल्यूटीओ से बाहर आना चाहिए, कृषि वस्तुओं, दूध उत्पादों, फलों, सब्जियों और मांस आदि पर आयात शुल्क कम करने के लिए भत्ता बढ़ाना चाहिए. विदेशों से और प्राथमिकता के आधार पर भारतीय किसानों की फसलों की खरीद करें.
5) किसानों और 58 वर्ष से अधिक आयु के कृषि मजदूरों के लिए पेंशन योजना लागू करके 10,000 रुपये प्रति माह की पेंशन दी जानी चाहिए.

6) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधार के लिए सरकार द्वारा स्वयं बीमा प्रीमियम का भुगतान करना, सभी फसलों को योजना का हिस्सा बनाना और नुकसान का आकलन करते समय खेत एकड़ को एक इकाई के रूप में मानकर नुकसान का आकलन करना.

7) भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को उसी तरीके से लागू किया जाना चाहिए और भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए निर्देशों को रद्द किया जाना चाहिए.

8) मनरेगा के तहत प्रति वर्ष 200 दिनों के लिए रोजगार उपलब्ध कराया जाए, मजदूरी बढ़ाकर 700 प्रति दिन की जाए और इसमें कृषि को शामिल किया जाए.

9) कीटनाशक, बीज और उर्वरक अधिनियम में संशोधन करके कपास सहित सभी फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार करना और नकती और घटिया उत्पादों का निर्माण और बिक्री करने वाली कंपनियों पर अनुकरणीय दंड और दंड लगाकर लाइसेंस रद्द करना.
10) संविधान की पांचवीं अनुसूची का कार्यान्वयन.
बताते चलें कि किसानों के दिल्ली कूच को रोकने के लिए पुलिस ने सख्त इंतजाम किए हुए हैं. ताकि आमजन को किसी तरह की परेशानी से बचाया जा सके. 

किसानों को दिल्ली आने से रोकने की तैयारी भी हो चुकी है. दिल्ली की तीनों सीमाएं- सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर को सील कर दिया गया है. ड्रोन से निगरानी की जा रही है. 

इतना ही नहीं, पूरी दिल्ली में धारा-144 भी लगा दी गई है. 12 फरवरी से 12 मार्च तक धारा-144 लागू रहेगी. पुलिस कमिश्नर संजय अरोड़ा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इस दौरान लोगों के एकजुट होने, रैलियां करने और लोगों को लाने-ले जाने वाली ट्रैक्टर ट्रॉलियों पर रोक रहेगी.   

प्रशासन ने लगाई धारा-144

धारा-144 समाज में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए लगाई जाती है. इस दौरान इलाके में चार या उससे ज्यादा लोग इकट्ठे नहीं हो सकते. 

दिल्ली पुलिस की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि किसानों के दिल्ली चलो मार्च के कारण तनाव, उपद्रव, अशांति और हिंसा फैलने का खतरा है. इसलिए सार्वजनिक सुरक्षा, शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात कदम उठाना जरूरी है. 
क्या-क्या पाबंदियां लगी हैं?

आदेश के मुताबिक, राजधानी दिल्ली के भीतर किसी भी रैली या जुलूस की अनुमति नहीं होगी और न ही सड़कों या रास्तों को ब्लॉक करने की अनुमति दी जाएगी. इसके अलावा, दिल्ली की बॉर्डर को पार करने की कोशिश करने वालीं ट्रैक्टर रैलियों पर भी प्रतिबंध रहेगा.

आदेश में लिखा गया है कि लोगों के इकट्ठा होने, सड़कों को ब्लॉक करने, रैली या पब्लिक मीटिंग करने पर प्रतिबंध रहेगा. किसी भी तरह के विस्फोटक, एसिड, पेट्रोल, सोडा वॉटर बोतल या ऐसी कोई भी चीज इकट्ठा करने या ले जाने पर भी रोक रहेगी, जिसका इस्तेमाल खतरा पैदा करने के लिए किया जा सकता है.

उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से आने-जाने वालीं गाड़ियों की भी सख्त चेकिंग की जाएगी. इसके अलावा बोलकर, लिखकर या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तेजित नारे या मैसेज का प्रसार करना भी गैरकानूनी माना जाएगा.