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दुष्कर्म केस में कोर्ट का बड़ा फैसला- दो बच्चों की मां जानती है अपना भला बुरा, सहमति से संबंध दुष्कर्म नहीं, आरोपी बरी
 

यमुनानगर में जिला कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में एक अहम फैसला सुनाया है। माननीय कोर्ट ने इस मामले में आरोपियों को बरी कर दिया है, वहीं महिला को लेकर भी कोर्ट ने टिप्पणी की है। 

अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश नेहा नौहरिया की कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के गांव बुडनपुर के गयूर, जब्बार व अमजद को बरी कर दिया है। यह मामला साल 2018 से चल रहा था।

मामले के अनुसार शहर पुलिस यमुनानगर ने चार अगस्त 2018 को पीडि़ता के पति की शिकायत पर गांव बुडनपुर निवासी गयूर, जब्बार व अमजद के खिलाफ दुष्कर्म, जान से मारने की धमकी, अपहरण, ब्लैकमेल, साजिश व अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। 

शिकायकर्ता के मुताबिक तीन अगस्त की रात को गयूर ने चाकू की नोंक पर उसकी पत्नी व दो बच्चों का अपहरण कर लिया और आरोपित ने राजस्थान व इलाहाबाद के होटल में पीडि़ता से गलत काम किया।

एडवोकेट इब्राहिम राणा ने बताया कि पीडि़ता व गयूर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिजनों से खतरा होने की बात कहकर प्रोटेक्शन के लिए फाइल भी तैयार करवाई थी। नशीला पदार्थ खिलाकर पीडि़ता के साथ गलत काम किया, यह भी कोर्ट में साबित नहीं हो पाया। 

जब पीडि़ता को अगवा किया, उस समय पति उसी कमरे में सो रहा था, जबकि देवर साथ के कमरे में परिवार के साथ था। सास-ससुर बरामदे में सो रहे थे। इतने लोगों की मौजूदगी में पीडि़ता व बच्चों का अपहरण कर लिया, यह भी साबित नहीं हो पाया। होटल के संचालक ने ही हस्ताक्षर व आधार कार्ड देने की गवाही दी।

सहमति से बनाए गए संबंध दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आते। दो बच्चों की मां अपना भला बुरा जानती है। घर में सो रहे परिजनों की मौजूदगी में चाकू की नोंक पर पीडि़ता व उसके बच्चों को अगवा करने की घटना भी गले से नहीं उतर रही है। होटल में कमरा बुक करवाते समय पीडि़त ने खुद अपना आधार कार्ड देकर रजिस्टर में हस्ताक्षर किए। इससे यह साबित नहीं होता कि उसे डरा धमकाकर ले जाया गया था।