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बिजलीघरों में गहराया कोयले का संकट, कोयले की किल्लत से हरियाणा में नौ बिजली प्लांट हुए बंद
 

Shortage Of Coal in Haryana - कोयले की खादानों में पानी भरने की वजह से सारे देश में बिजली संकट गहराने की कगार पर है। पर हरियाणा की बिजली इकाइयों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है। हरियाणा की बिजली उत्पादन इकाइयों के पास 5 से 7 दिन का कोयला बचा हुआ है हालांकि यह कोयला रूटीन की बजाय आपातकालीन स्थिति के लिए रखा जाता है। परंतु हरियाणा की बिजली इकाइयों को उम्मीद है की अगले 5 से सात दिनों में खादानों में भरा पानी सूख जाएगा और तब तक का कोयला उनके पास मौजूद है। इस कारण हरियाणा में बिजली सप्लाई बाधित नही होगी।।हरियाणा विद्युत उत्पादन निगम (एचपीजीसीएल) प्रदेश की कुल जरूरत का मात्र 19.76 फीसद बिजली उत्पादन करता है। यह 2582.40 मेगवाट बिजली है। इसमें 72.42 मेगावाट बिजली हाइडिल से बनती है। बाकी 2510 मेगावाट बिजली कोयले से चलते वाले प्लांट से बनती है।

लेकिन प्रदेश के अधिकतर कोयला आधारित बिजली प्लांट हाल-फिलहाल बंद पड़े हैं, क्योंकि उन्हें चलाने का खर्च ज्यादा आता है। हरियाणा में बंद प्लांट की संख्या नौ है, जबकि कोयला आधारित चल रहे प्लांट तीन हैं। पानीपत में छह प्लांट पूरी तरह से बंद हैं, जबकि तीन प्लांट चालू हालत में हैं। इनमें चालूत हालत के प्लांट में भी सात और आठ नंबर प्लांट 250-250 मेगावाट क्षमता के हैं और दोनों अभी बंद हैं। 210 मेगावाट क्षमता का प्लांट नंबर छह चालू है। यमुनानगर के 300-300 मेगावाट  क्षमता के दोनों प्लांट चालू हालत में हैं मगर फिलहाल बंद हैं। इसी तरह खेदड़ में 600-600 मेगावाट क्षमता के दो प्लांट हैं, लेकिन एक प्लांट चालू है और एक बंद कर रखा है।


हरियाणा के झज्जर में महात्मा गांधी थर्मल पावर प्लांट को जमीन हरियाणा की है जबकि उसमे बिजली उत्पादन एक निजी कंपनी द्वारा किया जाता है। जिससे की हरियाणा को इस प्लांट से 1198 मेगावाट बिजली इस प्लांट से मिलती है। इसी तरह झाड़ली में मौजूद पावर प्लांट ने भी हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार की सांझेदारी है। जिससे  589.5 मेगावाट बिजली मिलती है। हरियाणा को 7.05 फीसद यानी 846.14 मेगावाट बिजली भाखड़ा ब्याज मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) से मिलती है। केंद्र सरकार से 25.25 फीसद यानी 3027.66 मेगावाट बिजली हरियाणा को दी जाती है। सबसे अधिक 47.98 फीसद बिजली हरियाणा प्राइवेट कंपनियों से खरीदता है। यह 5762.20 मेगावाट बिजली बनती है, जो बाहर से खरीदी जा रही है। इसमें भी अकेले अडानी ग्रुप से 1414 मेगावाट बिजली की खरीद होती है। इसलिए हरियाणा कोयले की कमी की वजह से डेंजर जोन से बिल्कुल बाहर है।