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Navratri 2021: 7 अक्टूबर से शुरू है शारदीय नवरात्रि, जानें कलश स्थापना का महत्व और विधि
 

Chopal Tv, New Delhi

फेस्टिवल सीजन की शुरुआत हो चुकी है भगवान कृष्ण जन्माष्टमी के बाद हिंदी पंचाग के अनुसार 7 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होनी वाली है। नवरात्रि साल में 4 बार मनाई जाती है। दो बार गुप्त नवरात्रि होते है जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते है और दो नवरात्रि को धूमधाम से बनाया जाता है।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। नवरात्रि में नौ रातें और नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर 2021, गुरुवार से होकर 15 अक्टूबर, 2021 शुक्रवार तक है।

शारदीय नवरात्रि की शुरुआत अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। पुराणों में शारदीय नवरात्रि का खास महत्व बताया गया है। इन नौ दिनों तक दूर्गा मां की पूजा करने से सभी परेशानियों का नाश होता है।

नवरात्रि के प्रथम दिन माता की स्थापना और समापन पर विसर्जन किया जाता है। हर साल श्राद्ध के बाद ही नवरात्रि की शुरुआत होती है। शुरुआत के तीन दिनों में मां दुर्गा की शक्ति और ऊर्जा की पूजा की जाती है। इसके बाद जीवन में शांति देने वाली माता लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है।

और इसके बाद कला और ज्ञान की देवी, देवी महागौरी और नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री देवी की पूजा की जाती है। शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि का पहला दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है।

भक्त नवरात्रि के पहले दिन कलश की स्थापना करते है। ऐसी मान्यता है कि कलश को भगवान विष्णु का रूप माना जाता है। इसलिए नवरात्रि पूजा से पहले घटस्थापना यानी कलश की स्थापना की जाती है।

कैसे करें कलश स्थापना ?

  • सबसे पहले सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़ें पहनें।
  • मंदिर की साफ-सफाई करके एक सफेद या लाल कपड़ा बिछाएं।
  • इसके बाद उसके ऊपर एक चावल की ढेरी बनाएं।
  • एक मिट्टी के बर्तन में थोड़े से जौ बोएं और इसका ऊपर जल से भरा हुआ कलश स्थापित करें।
  • कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और कलावा बांधे।
  • एक नारियल लेकर उसके ऊपर चुन्नी लपेटें और कलावे से बांधकर कलश के ऊपर स्थापित करें।
  • कलश के अंदर एक साबूत सुपारी, अक्षत और सिक्का जरुर डालें।
  • अशोक के पत्ते कलश के ऊपर रखकर नारियल रख दें।
  • नारियल रखते हुए मां दुर्गा का आवाह्न करें और दीप जलाकर कलश की पूजा करें।
  • स्थापना के समय आप सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी किसी भी कलश का इस्तेमाल कर सकते हैं।