त्रिपुरा में नए CM के रूप में माणिक साहा ने ली शपथ, कहा – राज्य में लाएंगे पीएम मोदी का विकास मॉडल

माणिका साहा ने त्रिपुरा के नए सीएम के की शपथ ले ली है। बिप्लब कुमार के इस्तीफे के बाद BJP के डॉ. साहा को विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया था

 

माणिक साहा (Manik Saha) ने रविवार को त्रिपुरा के नए सीएम के रूप में शपथ ली है। अगरतला के राजभवन में सुबह 11.30 बजे राज्यपाल ने उन्हें शपथ दिलाई। इससे पहले शनिवार को बिप्लब देब ने अचानक सीएम पद से इस्तीफा देकर बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया था। हालांकि उनके इस्तीफे थोड़ी देर बाद ही माणिक साहा के नाम पर मुहर लग गई थी। साहा ने त्रिपुरा के 11वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है। शपथ लेने के बाद माणिक ने कहा कि हम पीएम मोदी और BJP के विकास के मुद्दे को लेकर ही राज्य में काम करेंगे।

उन्होंने कहा कि त्रिपुरा के लोगों की समस्याओं को हल करने के साथ-साथ राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही मुख्य मुद्दा होगा। साहा ने कहा कि राज्य में BJP के लिए कोई राजनीतिक चुनौती नहीं है। बता दें कि देब के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद 69 साल के डॉ साहा को BJP विधायक दल के नेता के रूप में चुना गया था।

Aमाणिक साहा पेशे से डेंटिस्ट हैं और उनकी छवि बेहद साफ मानी जाती है। माणिक को BJP में किसी खेमे का नहीं माना जाता है। माणिक साहा 2016 में कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल हुए थे। BJP में आते ही माणिक को चार साल बाद 2020 में प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। वो त्रिपुरा क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी बने। अब BJP ने उन्हें सीएम के ताज से नवाजा है। अगले साल होने वाले चुनाव से पहले बीजेपी ने त्रिपुरा में अपना चेहरा बदल दिया है।

2018 में सीएम बने थे बिप्लब देब

बिप्लब देब चार साल पहले 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में BJP की जीत के बाद सीएम बने थे। BJP ने 25 साल तक लगातार राज्य की सत्ता में रहे लेफ्ट फ्रंट को हराकर यह जीत हासिल की थी। 60 सीटों के लिए हुए मतदान में BJP को 34 सीटों पर जीत मिली थी। BJP की इस जीत से पहले लेफ्ट फ्रंट के नेता माणिक सरकार लगातार चार बार राज्य के सीएम बने थे। उनसे पहले भी त्रिपुरा में दशरथ देब की अगुवाई में लेफ्ट फ्रंट की ही सरकार थी। उस चुनाव में लेफ्ट पार्टियों को सिर्फ 16 सीटें ही मिली थीं।