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किसानों के लिए खास है भावांतर भरपाई योजना, जानिये कौनसी सब्जियां है शामिल ?

Chaupal Tv, Chandigarh

हरियाणा के राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि राज्य सरकार किसानों को बागवानी की मुक्चय फसलों के लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। बाजार में उपज के भाव कम होने की स्थिति में ‘भावांतर भरपाई योजना’के तहत किसानों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। राज्यपाल आज यहां आरंभ हुए चौदहवीं हरियाणा विधान सभा के प्रथम बजट सत्र के शुभारंभ अवसर पर सदन में अपना अभिभाषण देे रहे थे।

सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि हाल ही में बारह नई सब्जियों नामत: गाजर, मटर, बैंगन, शिमला मिर्च, भिण्डी, मिर्च, घीया, करेला, हल्दी, बन्दगोभी, मूली, लहसुन तथा तीन फलों-अमरूद, आम और किन्नू को भी इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रेडिंग, सोर्टिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, भण्डारण तथा फलों व सब्जियों के रेफ्रिजरेटिड ट्रांसपोर्ट के लिए इंटिग्रेटिड पैक हाउसेज़ स्थापित कर रही है और मध्यस्थों को हटाकर किसानों की बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने 14 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से 3 ऐसे पैक हाउस स्थापित किये हैं और वर्ष 2020 में विभिन्न बागवानी फसल समूहों में 181 करोड़ 72 लाख रुपये की लागत से 52 और ऐसी परियोजनाएं स्थापित की जायेंगी।

राज्यपाल ने कहा कि मार्केटिंग सीजन 2019-20 के दौरान 6 लाख 19 हजार मीट्रिक टन सरसों की रिकॉर्ड खरीद की गई। इसके अलावा 13 हजार 156 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद भी की गई। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की पूरी राशि किसानों के खातों में सीधे जमा कराई गई। तिलहनों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने और बढ़ाने के लिए हरियाणा को 2 जनवरी, 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रशस्ति पुरस्कार (कृषि कर्मण अवार्ड) प्रदान किया गया। उन्होंने कहा कि खरीद में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ‘किसान पंजीकरण पोर्टल (मेरी फसल मेरा ब्यौरा) के माध्यम से फसलों की अधिकतम मात्रा में खरीद करने के हर सम्भव प्रयास किये जा रहे हैं, जिसमें चार मानदण्ड नामत: किसान द्वारा स्वयं प्रविष्टि, ई-गिरदावरी, कृषि विस्तार अधिकारियों द्वारा सत्यापन और उपग्रह चित्रों के माध्यम से प्रमाणीकरण का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस माध्यम से चालू रबी सीजन में अब तक 6 लाख 40 हजार से अधिक किसानों का पंजीकरण किया गया है। चालू वित्त वर्ष के दौरान 93 लाख 60 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की गई और किसानों को इसके लिए 17,222 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया। उन्होंने कहा कि खरीफ  मार्केटिंग सीजन 2019-20 के दौरान 11,870 करोड़ 62 लाख रुपये की राशि से 64 लाख 69 हजार मीट्रिक टन धान की खरीद 1,835 रुपये प्रति ञ्चिवंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की  गई।

सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि मेरी सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए सामूहिक इनपुट मैनेजमैंट, उपज संग्रह और उनकी कृषि व्यापार गतिविधियों के प्रबन्धन को बढ़ावा देने के लिए ‘किसान उत्पादक संगठनों’की स्थापना को प्रोत्साहित कर रही है। अब तक राज्य के विभिन्न खण्डों में 409 किसान उत्पादक संगठन बनाए जा चुके हैं और वर्ष 2022 तक इनकी संक्चया बढ़ाकर 1,000 करने की योजना बनाई गई है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खादों के उचित उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किसानों को लगभग 81 लाख 69 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किये गये हैं। इस वर्ष कृषि विपणन समितियों की 111 मंडियों और सबयार्ड में मृदा जांच प्रयोगशालाएं स्थापित करने का सरकार का लक्ष्य है। इन जांच परिणामों के आधार पर खण्ड स्तरीय उर्वरता मानचित्र तैयार किये जाएंगे। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा गांव सेरसा में मसाला मण्डी, पिंजौर में सेब मण्डी और गुरुग्राम में फूल मण्डी भी विकसित की जाएगी।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा हेतु फसल अवशेष प्रबंधन के लिए एक व्यापक अभियान चलाया गया। मशीनों पर 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान करके लगभग 1,672 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किये गये हैं। फसल अवशेषों के स्थान पर ही (इन-सिटू) प्रबंधन के लिए लगभग 5,228 किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर उपकरण प्रदान किए गए हैं। फसल अवशेषों को दूसरे स्थान पर ले जाकर इनका प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए विपणन व्यवस्था करने के भी प्रयास किये गये हैं।

राज्यपाल ने कहा कि हरियाणा के जो किसान मूलधन की अदायगी समय पर करते हैं, उन्हें बिना किसी ब्याज के फसली ऋण प्रदान किये जा रहे हैं। वर्ष 2018-19 के दौरान लगभग पांच लाख किसानों को 127 करोड़ 88 लाख रुपये की ब्याज राहत दी गई है। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों और जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों से ऋण लेने वाले ऐसे किसानों, जो ऋण की अदायगी न करने के कारण डिफाल्टर हो गये थे, उन्हें बड़ी राहत पहुंचाने के लिए पहली सितम्बर, 2019 से एकमुश्त निपटान योजना शुरू की गई। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत प्राथमिक सहकारी कृषि समितियों के लगभग 8 लाख 50 हजार डिफाल्टर सदस्यों में से लगभग 4 लाख 14 हजार सदस्यों ने 31 जनवरी, 2020 तक 858 करोड़ 77 लाख रुपये की राशि के ब्याज का लाभ उठाया है। इसी प्रकार, जिला केन्द्रीय सहकारी बैंकों के 31,749 डिफाल्टर कजऱ्दारों में से 7,634 ने 31 जनवरी, 2020 तक लगभग 497 करोड़ 40 लाख रुपये की राशि के ब्याज का लाभ उठाया है। हरियाणा राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की वसूली से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत पहली सितक्वबर, 2019 से 31 जनवरी, 2020 तक 10 हजार 564 डिफाल्टर कजऱ्दारों ने 83 करोड़ 8 लाख रुपये की राशि का लाभ उठाया है।

सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि मेरी सरकार बोई गई फसल के सटीक आंकड़े सुनिश्चित करने और प्राकृतिक आपदाओं से फसलें खराब होने की स्थिति में उचित मुआवज़ा प्रदान करने के लिए खरीफ 2019 में पहली बार की गई ई-गिरदावरी को निरन्तर जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि मेरी सरकार राज्य के पशुधन को उच्चकोटि की पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में 2.20 लाख पशुओं का बीमा किया गया है। पहली सितक्वबर, 2019 से राष्ट्रीय कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक संयुक्त टीके का उपयोग करके राज्य में गायों और भैंसों को मुंह-खुर की बीमारी से मुक्त बना रही है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में राज्य का कुल वार्षिक दुग्ध उत्पादन 107.26 लाख टन तक पहुंच गया और प्रति व्यक्ति प्रतिदिन दूध की उपलब्धता बढक़र 1,085 ग्राम हो गई है। इस सम्बन्ध में हरियाणा का देश में दूसरा स्थान है। पशुधन के विकास और पशुपालकों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु पशुपालकों को पशु किसान क्रेडिट कार्ड दिए जाएंगे।

 सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि राज्य सरकार हर किसान को पानी का समान वितरण सुनिश्चित करने को उच्च प्राथमिकता दे रही है। रावी-ब्यास का हमारा न्यायोचित हिस्सा सतलुज-यमुना लिंक नहर के माध्यम से यथाशीघ्र हरियाणा में लाने के लिए हरसक्वभव प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि मेरी सरकार हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी टेलों तक पानी पहुंचाने का अभियान शुरू किया गया है। अप्रैल, 2020 तक हमीदा हैड से इंद्री हैड तक डब्ल्यूजेसी एमएलएल की वर्तमान क्षमता 13,000 क्यूसिक से बढ़ाकर 17,530 क्यूसिक की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में पश्चिमी यमुना कैनाल प्रणाली की क्षमता बढ़ाने से हरियाणा को मानसून के दौरान यमुना नदी से 30 प्रतिशत अतिरिक्त पानी पहले ही मिल रहा है, जबकि इससे पहले यह पानी व्यर्थ ही नदी में बह जाता था। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एक योजना पर कार्य कर रही है, जिसके तहत मार्च 2022 तक पश्चिमी यमुना कैनाल की क्षमता में 40 प्रतिशत और वृद्धि की जाएगी।

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