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Wheat Price Hike: गेहूं के भाव में उछाल, रिकार्ड टूटा, अभी और बढ़ेंगे दाम

Vikash Kumar
6 Aug 2022 2:30 PM GMT
Wheat Price Hike: गेहूं के भाव में उछाल, रिकार्ड टूटा, अभी और बढ़ेंगे दाम
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पहले गेहूं का स्टाक अधिक नहीं होता था। इस समय गेहूं में स्टाकिस्ट सक्रीय है

थोक बाजार में गेहूं की कीमत इस समय पुराने सभी रिकार्ड तोड़ चुकी है। गेहूं दड़ा जो सबसे अधिक बिकता है और गेहूं का भाव पूछते ही, इसकी कीमत बताई जाती है वह इस समय 2420 रुपये क्विंटल हो चुका है। इससे पहले गेहूं की अब तक की सर्वाधिक कीमत कोरोना काल में थी जब गेहूं 2,400 रुपये प्रति क्विंटल के भाव तक बिका था।

कारोबारियों का कहना है कि गेहूं की कीमत और बढ़ेगी क्योंकि अब अगले वर्ष ही नई फसल आनी है। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से जिन देशों में जरूरत थी गेहूं का निर्यात किया गया था। अप्रैल में जब नया गेहूं आया था, तब इसका थोक बाजार में भाव 1,950 रुपये से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल था। निर्यात शुरू हुआ तो इसकी कीमत 2,175 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। निर्यात नियंत्रित करने संबंधी नियम लागू होते ही गेहूं अगले ही दिन गिरकर 2,025 रुपये क्विंटल हो गया। कुछ दिन कीमत स्थिर रही लेकिन कीमतें फिर बढ़ने लगीं और अब यह 2420 रुपये पर है।

पहले गेहूं का स्टाक अधिक नहीं होता था। इस समय गेहूं में स्टाकिस्ट सक्रीय है। अकेले जिले की समालखा में मंडी में दो लाख कट्टे गेहूं का स्टाक बताया जा रहा है। गेहूं की ज्यादातर खरीद सरकार करती थी। इस बार सीजन में गेहूं की आवक मंडियों में कम रही। खरीद का टारगेट भी पूरा नहीं हो पाई। तेजी के चक्कर में किसानों के साथ-साथ स्टाकिस्ट सक्रीय रहे। रुस-यूक्रेन युद्ध के कारण गेहूं का निर्यात हुआ जिससे दाम बढ़े। बाद में निर्यात पर रोक लगी। तब भाव में गिरावट रही।

समालखा मंडी एसोसिएशन के पूर्व प्रधान रहे प्रवीण ने बताया कि गेहूं में और अधिक तेजी की संभावना है। जल्द ही भाव 2500 रुपये कि्वंटल क्रास कर सकता है। गेहूं के सीजन में भाव कम रहता है इस बार सीजन में समर्थन मूल्य से अधिक भाव पर गेहूं बिका।

पानीपत अनाज मंडी में इस बार गेहूं की आवक 4 लाख 72 हजार 621 क्विटंल रही। जबकि पिछले वर्ष सीजन के दौरान 7 लाख 23 हजार 662 क्विंटल गेहूं की आवक हुई थी। अर्थात आधा गेहूं मंडी में आया। उपसचिव मार्केट कमेटी पानीपत के अनिल मान के अनुसार भाव तेज होने के कारण मंडियों में गेहूं की आवक कम रही। स्टाकिस्ट सक्रीय रहे। इस बार दाना भी कमजोर था गेहूं की फसल भी कम हुई।

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